तू है दिल के पास (रफ़ी की याद में एक गजल)

क्या थी वो बरसात की रात,वोह तो थी कयामत की रात।जिंदगी और मौत  की उस जंग  में ,खानी पड़ी जिंदगी को मात।  टूट गयी साँसों की डोरी जब,खामोश हुई आवाज़ तो खो गए गीत।दर्द का सागर लहरा  उठा,जब चिर निंद्रा में सो गया हमारा मीत।टूटे हुए अरमानो की नाव ले चली,एक तनहा मुसाफिर को करने... Continue Reading →

धर्म के नाम पर दे दे बाबा

- विनोद विप्लव भारत में आज धर्म का बोलबाला है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के चरम विकास के इस युग में हमारे देश की बहुसंख्यक जनता की सोच में धर्म और आस्था हावी होती जा रही है। कुछ समय पूर्व एक प्रमुख राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्रिका की ओर से कराये गये सर्वेक्षण में यह तथ्य उभर... Continue Reading →

भूत चैनल

हमारे देश की जनसंख्या एक अरब से भी अधिक हो गयी है। हमारे देश में हर साल तकरीबन एक करोड़ लोगों की मौत होती है। हिन्दी के टेलीविजन चैनलों ने अपने शोधों से पता लगाया है कि मरने वाले शर्तिया तौर पर भूत बनते हैं और इस तरह से कहा जा सकता है कि हर... Continue Reading →

कर्मवीर बनाम फलवीर

गीतोपदेश के आधार पर कहा जा सकता है कि हमारे देश में दो तरह के लोग हैं। पहले तरह के लोगों को केवल कर्म का अधिकार है। कर्म के फल पर उनका कोई अधिकार नहीं है, जबकि दूसरे तरह के लोगों का केवल फल पर अधिकार होता है, उनका कर्म पर कोई अधिकार नहीं होता है।... Continue Reading →

व्यंग्य – मैं, मैं नहीं हूं

आप जो हैं, वह दरअसल आप नहीं, मैं हूं। मैं जो हूं, दरअसल मै नहीं, कोई और हूं। मेरी कंपनी का जो मालिक है वह दरअसल यहां का चपरासी है और मैं जो इस कंपनी का अदना सा कर्मचारी हूं, सच्चाई यह है कि मैं ही इस कंपनी का मालिक हूं। आप शायद चक्कर में... Continue Reading →

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