जो शीशा गर हैं वो भी बात ये मेरी जरा सुन लें – रफी के सामने सारे ही शीशे चूर होते हैं

जावेद नसीम 

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Sketch of Mohammad Rafi by Mohammad Salim
बात उस वक्त की है जब मेरी उम्र 6 साल की थी। मैं परिवार के साथ कोलकाता के हिन्द सिनेमा में फिल्म देखने गया था। वापस आया तो मेरी जबान पर मेरे ही अंदाज में एक नगमा चढ़ा  हुआ था – एहसान तेरा होगा मुझ पर। मुझे नहीं पता था कि यह गीत है, गजल है या कुछ और है। किसने लिखा, किसने गाया। मुझे कोई अंदाजा नहीं था। मैं ना ही फिल्म के कलाकारों को पहचानता था। ना ही मुझे ये मालूम था कि फिल्म क्या होती है लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बस गई थी – वो आवाज। मुझे नहीं पता था कि किस की आवाज थी पर ऐसा लगता था कि कानों में अमृत घुल गया है।
दिन गुजरते गए। मेरी जिद पर अब्बा ने फिलिप्स का एक रेडियो खरीद दिया। छोटे-छोटे हाथों से सुई घुमा-घुमा कर वो आवाज तलाष करता रहा और फिर तो जैसे मेरी ईद हो गई। वो आवाज अलग – अलग अंदाज में मेरे कानों में रस घोलने लगी और मैं उस आवाज का दीवाना होता चला गया। वो आवाज थी रफी साहब की।
वक्त के साथ जिंदगी में बहुत सारी चीजें बदलने लगी पर जो कभी नहीं बदला वो थी रफी साहब से मेरी मुहब्बत। जैसे-जैसे मैं उन्हें सुनता गया वो मेरे आदर्श बनते चले गए। इतनी मधुरता, इतनी सादगी, इतनी जज्बात निगारी और इतनी सारी शैलियों में पूरी कामयाबी के साथ खुद को कायम रखना इतना आसान नहीं था। पर रफी साहब के लिए ये कभी मुष्किल भी नहीं रहा । मैं रफी साहब को पाश्र्वगायन के सरताज और सरदार की हैसियत से देखता हूं और यह मानता हूं कि वो एक ट्नेंड सेटर थे क्योंकि उनसे पहले पाष्र्व गायन का अंदाज कुछ और ही हुआ करता था और सारे गायकों पर  के एल सहगल साहब पूरी तरह से हावी थे। ऐसे में रफी साहब ने हिन्दी फिल्म जगत को एक नया अंदाज दिया और एक नई बुलंदी दी। वह ए क्लास के अभिनेताओं की पहली पसंद थे और बी और सी क्लास के अभिनेताओं के लिए मसीहा बन गए। अंजान चेहरों के लिए उनकी आवाज उनकी जिंदगी का सरमाया बन गई।

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Aazadi Satyagrah for the children of Gorakhpur

Join Team MASUKA at Jantar Mantar at 4:00 pm on August 14, 2017. In view of the unfortunate loss of young lives at Gorakhpur on August 8, ’17 and the brutal murder of Ragini Dubey at Balia, Uttar Pradesh and other encroachments on women rights and liberty, we, the children of Bapu, Mahatma Gandhi will be holding an Aazadi Satyagrah. Team MASUKA will introspect in … पढ़ना जारी रखें Aazadi Satyagrah for the children of Gorakhpur

घर पर कैसे बनायें ”फिल्टर पम्प”

हम सुझायें आप बनायें श्रृंखला से प्रकाशित आलेख। इसके तहत घर में विभिन्न उपकरणों को बनाने के सुझाव बताये गये थे। यह आलेख प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ में सितम्बर, 1992 के अंक में प्रकाशित हुआ था। पढ़ना जारी रखें घर पर कैसे बनायें ”फिल्टर पम्प”

घर पर कैसे बनायें थियोडोलाइट /दूरस्थ वस्तु की उंचाई मापने का यंत्र/

हम सुझायें आप बनायें श्रृंखला से प्रकाशित आलेख। इसके तहत घर में विभिन्न उपकरणों को बनाने के सुझाव बताये गये थे। यह आलेख प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ में मार्च, 1980 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इसमें बताया गया था कि कैसे घर में थियोडोलाइट नामक उपकरण बना सकते हैं। यह यंत्र दूर स्थित किसी वस्तु — घर, पहाड़, पेड़ आदि की उंचाई मापने … पढ़ना जारी रखें घर पर कैसे बनायें थियोडोलाइट /दूरस्थ वस्तु की उंचाई मापने का यंत्र/

बचपन में लिखी कविता — इंद्र्घनुष 

शांति डाइजेस्ट नामक पत्रिका में अगस्त 1982 में प्रकाशित पढ़ना जारी रखें बचपन में लिखी कविता — इंद्र्घनुष 

घर पर कैसे बनायें हाइड्रोमीटर /तरल मापक/

हम सुझायें आप बनायें श्रृंखला से प्रकाशित आलेख। इसके तहत घर में विभिन्न उपकरणों को बनाने के सुझाव बताये गये थे। कुछ आलेख प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ में प्रकाशित हुये थे और कुछ अन्य पत्रिकाओं में। यहां पेश है शा​न्ति डाइजेस्ट नामक पत्रिका में मई—जून, 1981 में प्रकाशित आलेख जिसके तहत बताया गया था कि घर पर ही बहुत आसानी एवं कम से कम … पढ़ना जारी रखें घर पर कैसे बनायें हाइड्रोमीटर /तरल मापक/

एक पुरानी कहानी : एक नया षडयंत्र

काफी वर्ष पहले लिखी गयी एक कहानी, जो बाद में दून दर्पण में 15 अगस्त 1990 को प्रकाशित हुयी थी। पढ़ना जारी रखें एक पुरानी कहानी : एक नया षडयंत्र

तब मैं बे-नौकरी रहना ज्यादा पसंद करूंगा!

अगर जनता चेत गयी तो चैनल चलाने वालों की खैर नहीं : ढिबरी न्यूज चैनल को लेकर लिखे मेरी दो व्यंग्य रचनाओं –  ‘ढिबरी न्यूज में भर्ती अभियान’ और ‘ढिबरी न्यूज में चैनल प्रमुख के लिए खुली अर्जी‘ – पर मुझे जो प्रतिक्रियायें मिलीं, वे अभूतपूर्व हैं। ये दोनों व्यंग्य लिखने के दौरान मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि दो अदद व्यंग्य रचनाओं के कारण टेलीविजन चैनलों में मेरे इतने अधिक प्रशंसक एवं दुश्मन पैदा हो सकते हैं। यह बात जरूर है कि पैदा होने वाले मेरे दुश्मनों की संख्या से कई गुना अधिक संख्या मेरे प्रशंसकों की रही और यह बात केवल यही जाहिर करती है कि चैनलों में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के प्रति वहां काम करने वाले मीडियाकर्मियों के मन में किस तरह का आक्रोश है। पढ़ना जारी रखें “तब मैं बे-नौकरी रहना ज्यादा पसंद करूंगा!”

The Rape of Draupadi

by Satya Chaitany

(As according to Bheel Mahabharata )

The tribal Bheels have a Mahabharata version of their own, episodes of which are narrated or sung during their festivals, usually accompanied by music and sometimes with dance – a captivating version that never fails to thrill, one of the secrets of its allure being its truly enchanting folktale-like quality. This article tries to understand an episode from it, on its own and in relation to Vyasa’s epic.

Draupadi is having her siesta one beautiful afternoon in Hastinapura. Her maids gently comb her hair as she sleeps. पढ़ना जारी रखें “The Rape of Draupadi”