संरक्षित: चिल्लर लोग, चिल्लर सोच – विनोद विप्लव

यहाँ कोई उद्धरण नही है क्योंकि यह एक संरक्षित पोस्ट है।

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भूत चैनल

हमारे देश की जनसंख्या एक अरब से भी अधिक हो गयी है। हमारे देश में हर साल तकरीबन एक करोड़ लोगों की मौत होती है। हिन्दी के टेलीविजन चैनलों ने अपने शोधों से पता लगाया है कि मरने वाले शर्तिया तौर पर भूत बनते हैं और इस तरह से कहा जा सकता है कि हर... Continue Reading →

कर्मवीर बनाम फलवीर

गीतोपदेश के आधार पर कहा जा सकता है कि हमारे देश में दो तरह के लोग हैं। पहले तरह के लोगों को केवल कर्म का अधिकार है। कर्म के फल पर उनका कोई अधिकार नहीं है, जबकि दूसरे तरह के लोगों का केवल फल पर अधिकार होता है, उनका कर्म पर कोई अधिकार नहीं होता है।... Continue Reading →

व्यंग्य – मैं, मैं नहीं हूं

आप जो हैं, वह दरअसल आप नहीं, मैं हूं। मैं जो हूं, दरअसल मै नहीं, कोई और हूं। मेरी कंपनी का जो मालिक है वह दरअसल यहां का चपरासी है और मैं जो इस कंपनी का अदना सा कर्मचारी हूं, सच्चाई यह है कि मैं ही इस कंपनी का मालिक हूं। आप शायद चक्कर में... Continue Reading →

वीर अनशनकारियों का देश

अन्ना हजारे से नाराज हमारे महान नेताओं और मंत्रियों को इस बात पर घोर आपत्ति है कि केवल 12 दिन भूखे रह कर एक मामूली आदमी जननायक बन गया जबकि वर्षों से देश सेवा में जी-जान से जुटे नेताओं और मंत्रियों को कोई भाव नहीं दे रहा है, जिनकी बदौलत देश के लाखों गरीब, मजदूर... Continue Reading →

ढिबरी चैनल का घोषणापत्र

(नोट - यह व्यंग्य रचना महान व्यंग्कार एवं गुरूवर हरिशंकर परसाई की एक प्रसिद्ध व्यंग्य रचना से प्रभावित है और मुझे लगता है कि अगर परसाई जी आज जीवित तो इस विषय पर जरूर कलम चलाते।) (वैसे ढिबरी चैनल के बारे में विज्ञापन तो अखबारों में छप चुका था, लेकिन ढिबरी न्यूज के ‘‘एम्स एंड... Continue Reading →

कृष्ण कब वादा निभाएंगे

विनोद विप्लव कृष्ण ने महाभारत के समय वादा किया था कि जब-जब धर्म की ग्लानि होगी और अधर्म बढ़ेगा, तब-तब वह धर्म के उत्थान के लिए, साधुओं के त्राण के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए तथा धर्म संस्था की स्थापना के लिए जन्म लेंगे। जबसे कृष्ण ने यह वादा किया तब से लाखों -... Continue Reading →

सत्यवादी क्रांति

- विनोद विप्लव भारत दिनों एक महान क्रांति के दौर से गुजर रहा है। वैसे तो हमारे देश और दुनिया में कई क्रांतियां हुयी हैं। मसलन औद्योगिक क्रांति, साम्यवादी क्रांति, समाजवादी क्रांति, पूंजीवादी क्रांति, और श्वेत एवं हरित जैसी रंगवादी क्रांतियां। लेकिन भारत में आज जिस क्रांति की लहर चल रही है उसकी तुलना में... Continue Reading →

अकर्मण्ये वधिकारस्ते…..

राजस्थान में एक अच्छा काम हुआ लेकिन उस पर भी सवाल उठ गया। कुछ पढ़े-लिखे लोगों को गोलमा देवी का मंत्री बनना बर्दाष्त नहीं हुआ। इनका कुतर्क है कि जो महिला ‘‘लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर’’ है, वह काम क्या खाक करेगी। मानो जो पढ़े-लिखे हैं वे ही काम करते हैं और सही काम करते है।... Continue Reading →

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