पटना: एनडीए (NDA) के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का मामला रालोसपा (RLSP) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर निर्भर करेगा। हालांकि, एनडीए में चल रही तनातनी ने सीट बंटवारे की पटकथा पहले ही लिख दी है।

जानकारी के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए से नाता तोड़ने की स्थिति में इस गठबंधन में जदयू, भाजपा और लोजपा के रूप में तीन ही घटक दल बचेंगे। ऐसी नौबत आने पर दो फॉर्मूला तय किए जाने की चर्चा है। पहला फॉर्मूला 18-18 और चार का जबकि दूसरा 17-17 और छह का है। अब इनमें से कौन सा फॉर्मूला लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए जमीन पर उतारेगा यह लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान पर निर्भर करेगा। बताया जा है कि पासवान के समक्ष दो विकल्प हैं। यदि वे लोकसभा चुनाव न लड़कर राज्यसभा जाना चहों तो लोजपा के चार प्रत्याशी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरेंगे।

अगर रामविलास पासपान खुद भी लोकसभा चुनाव लड़ें तब उनके दल को कुल छह सीटें मिल सकती हैं। तब भाजपा और जेडीयू में 17-17 सीटें बंटेंगी। गौरतलब है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दिल्ली में गत 26 अक्टूबर को मुलाकात की थी। उसी दिन शाह ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह ऐलान किया था कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले एनडीए में अलग-थलग पड़ते जा रहे रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा को सांसद डॉ. अरुण कुमार का साथ मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उपेन्द्र के हमलावर तेवर पर भाजपा और लोजपा ने निशाना साधा तो सांसद अरुण कुमार, कुशवाहा के साथ खड़े दिख रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ ही उप मुख्यमंत्री के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। रालोसपा से अलग हुए सांसद डॉ. अरुण कुमार ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री पर कुशवाहा के आरोपों को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि जदयू और रालोसपा दोनों एनडीए में हैं। ऐसे में कुशवाहा के आरोपों का जवाब एनडीए नेताओं को देना चाहिए।

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