जो शीशा गर हैं वो भी बात ये मेरी जरा सुन लें – रफी के सामने सारे ही शीशे चूर होते हैं

जावेद नसीम 

img034
Sketch of Mohammad Rafi by Mohammad Salim
बात उस वक्त की है जब मेरी उम्र 6 साल की थी। मैं परिवार के साथ कोलकाता के हिन्द सिनेमा में फिल्म देखने गया था। वापस आया तो मेरी जबान पर मेरे ही अंदाज में एक नगमा चढ़ा  हुआ था – एहसान तेरा होगा मुझ पर। मुझे नहीं पता था कि यह गीत है, गजल है या कुछ और है। किसने लिखा, किसने गाया। मुझे कोई अंदाजा नहीं था। मैं ना ही फिल्म के कलाकारों को पहचानता था। ना ही मुझे ये मालूम था कि फिल्म क्या होती है लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बस गई थी – वो आवाज। मुझे नहीं पता था कि किस की आवाज थी पर ऐसा लगता था कि कानों में अमृत घुल गया है।
दिन गुजरते गए। मेरी जिद पर अब्बा ने फिलिप्स का एक रेडियो खरीद दिया। छोटे-छोटे हाथों से सुई घुमा-घुमा कर वो आवाज तलाष करता रहा और फिर तो जैसे मेरी ईद हो गई। वो आवाज अलग – अलग अंदाज में मेरे कानों में रस घोलने लगी और मैं उस आवाज का दीवाना होता चला गया। वो आवाज थी रफी साहब की।
वक्त के साथ जिंदगी में बहुत सारी चीजें बदलने लगी पर जो कभी नहीं बदला वो थी रफी साहब से मेरी मुहब्बत। जैसे-जैसे मैं उन्हें सुनता गया वो मेरे आदर्श बनते चले गए। इतनी मधुरता, इतनी सादगी, इतनी जज्बात निगारी और इतनी सारी शैलियों में पूरी कामयाबी के साथ खुद को कायम रखना इतना आसान नहीं था। पर रफी साहब के लिए ये कभी मुष्किल भी नहीं रहा । मैं रफी साहब को पाश्र्वगायन के सरताज और सरदार की हैसियत से देखता हूं और यह मानता हूं कि वो एक ट्नेंड सेटर थे क्योंकि उनसे पहले पाष्र्व गायन का अंदाज कुछ और ही हुआ करता था और सारे गायकों पर  के एल सहगल साहब पूरी तरह से हावी थे। ऐसे में रफी साहब ने हिन्दी फिल्म जगत को एक नया अंदाज दिया और एक नई बुलंदी दी। वह ए क्लास के अभिनेताओं की पहली पसंद थे और बी और सी क्लास के अभिनेताओं के लिए मसीहा बन गए। अंजान चेहरों के लिए उनकी आवाज उनकी जिंदगी का सरमाया बन गई।
एक जमीन एक चांद एक सूरज
और नगमों का खुदा एक रफी
तुझ से पहले, ना तेरे बाद कोई 
गर कोई है तो फक़त एक रफी ।
रफी साहब की सख्सियत का जादू ये था कि इंडस्टी में  होने के बावजूद उनके नाम से कभि कोई विवाद नहीं जूडा। जबान पर उनका नाम आते ही खुद ब खुद साहब निकल आता और मजे की बात यह कि रफी साहब सिफ देश की आवाज नहीं बल्कि जरूरत बन गए। लोकप्रियता हासिल करने का ऐसा जरिया कोई नहीं कि आप इनसे मोहब्बत करें और मशहूर हो गए। इनके गीत गाए और मशहूर हो गए। हद तो यह है कि इनके खिलाफ दो निगेटिव शब्द कह कर भी आप मशहूर हो जाते हैं।
आज भी उनके जाने के 37 साल के बाद भी लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं। आज भी म्युजिक कंपनियां उनके गीतों से लाखों कमाती है। आज भी पूरी दुनिया में उनके गीतों को गाकर लोगों ने अपनी पहचान बनाई है और जिंदगी में कामयाब हो रहे हैं। आज भी लाखों औरगेनाइजर रफी साहब पर प्रोग्राम करते हैं और ये प्रोग्राम उनकी कामयाबी और उनकी आर्थिक मजबूती का सबब बन जाती है।
एजाज है ये तेरा, एज़ाज है ये तेरा
कितने ही रफी बनकर दुनिया मे पल रहे हैं।
एक बात आप लोगों से शेयर करना चाहता हूं जो मेरी जिंदगी का एक यादगार किस्सा बन गया। कोलकाता से नई दिल्ली जाते हुए एसी2 टीयर में मेरी मुलाकात एक सरदार जी से हुई जिनकी उम्र तकरीबन 80 साल थी। मैं अपनी बर्थ पर लेटा था और मोबाइल पर रफी साहब के गाने सुन रहा था । मैंने महससू किया कि सरदार जी आंखें बंद किए वो गाने सुन रहे थे और हल्के-हल्के अपने पांव हिला रहे थे। मुझे शरारत सूझी। उस वक्त ‘‘मित्तर प्यारे नू’’ बज रहा था। मैंने अचानक शब्द बंद कर दिया। वो चैंक गए और कहने लगे – बेटा आपने बंद क्यों कर दिया।
मैंने कहा, ‘‘आप ये गाने सुनते हैं।
बोले – पहली बात तो ये बेटे कि ये गाना नहीं और दूसरी बात ये कि और है हि कौन जिसको सुना जाए? ।
मैं 30 सालों के बाद ये गाने सुन रहा हूं। आपका गानों का चुनाव बहुत अच्छा है। बात निकली और वह कहने लगे – रफी साहब फरिश्ता थे। पैगम्बर थे। अवतार थे जो गायक के रूप में दुनिया में आए।
मैंने कहा, इतनी बड़ी बात तो मैं नहीं कह सकता। बोले ये बताओ  कि गुरू नानक जी, साई बाबा, राम जी, जीसस, नोयाह और आप के मोहम्मद – इन लोगों ने दुनिया को क्या दिया। शांति और  भाई चारे का पैगाम। यही ना। तो बेटे ये बताओ कि रफी साहब ने दुनिया वालों को क्या दिया। वही अमन और शांति का पैगाम। अंतर ये ही उन्होंने अपने तरीके से दिया और रफी साहब ने अपने तरीके से दिया पर बात तो वही हुई ना। इसलिए मै रफी साहब को अवतार मानता हूं।
मैं खामोश उनको ताकता रह गया।
तारीख थी चैबीस की, चैबीस का सन था।   (24 दिसंबर, 1924)
उतरा था आसमां से, जमीं उसका वतन था।
वो शख्स अपनी जात में एक गंंग ओ जमन था।
फूलों  पे खाक डालिए , वो खुद में चमन था।
और जो बात दिल से निकलती है वो कुछ यूं है कि।
वो एक शख्स…………
वो एक शख्स जो फूलों की बात करता था
वो एक शख्स  जो रंगोें की बात करता था
वो एक शख्स जो जज्बों की बात करता था
वो एक शख्स जो लम्हों की बात करता था
वो शख्स  अब भी सितारों के साथ रहता है।
वो शख्स  अब तलक सांसों में यू ही बसता है
कोई भी रंग हो, मौसम हो या कोई लम्हा
वो शख्स याद की वादी में संग चलता है
जमाने बीत गए और बदल गई दुनिया
मगर बदला नहीं चाहत का सिलसिला अपना
मैं कैसे बात करूं और कहां से लाउं उसे
मगर ये भी नहीं मुमकिन की भूल जाउं उसे
शफकतों की जो किसी मेें सा बरसता था
जिसकी तानों में कोई देवता सा बसता था
वो एक शख्स जो इंसान नहीं फरिश्ता था
वो शख्स  जिससे हमारा भी एक रिश्ता था।
जाउं कहां…….
फलक डगमगाए तो जाउं कहां
जमीं थरथराए तो जाउं कहां
तेरा ही सहारा था तू भी नहीं
तेरी याद आए तो जाउं कहां
कोई तो बता दे जहां तू मिले
मैं ढूंढूं कहां
तुझ को पाउं कहा।
उमडता है सीने में बस एक धुआं
किसे जाके रोऊं  सुनाउं कहां
दिया दाग तू ने जो दिल को मेरे
मैं धोऊं तो  कैसे मिटाउं कहां।
गमों के खजाने जो तू ने दिए
छुपाउं तो क्यों कर छुपाउं कहां
हैं ख्वाहिश मुझे बस तेरे दीद की
बुलाउं तो कैसे, बुलाउं कहां
रफी याद तेरी है जैसे जहर
मैं घूंटूं तो कैसे निकालू कहां
– जावेद नसीम
नोट : यह आलेख मोहम्मद रफी के बारे में शीघ्र प्रकाशित होने वाली पुस्तक — मोहम्मद रफी का संसार / The World of Mohammad Rafi में शामिल किया जाएगा।   इस पुस्तक का संपादन विनोद विप्लव कर रहे हैं।

Javed naseemपरिचय : “अपने बारे में कहना ऐसे तो बड़ा मुश्किल काम है लेकिन अगर अपनी बात करूँ तो यूँ समझें के ज़िन्दगी आसान नहीं थी. नौ साल की उम्र से ही फ़ैमिली का बोझ सर पे आगया, बचपन कब बिता पता ही नहीं चला होश संभालते ही म्यूजिक को खुद से क़रीब पाया और रफी साहब के रूप में अपना रोल मॉडल. बचपन से उनको ही सुनता रहा और एक ऐसा समय आया जब मुझे लगने लगा के मेरे बदन में दो चीज़ें दौड़ती हैं….. मेरा खून और रफी साहब की मुहब्बत. जीवन का दुख के उनसे मिल ना सका और सुख यह के बेगम रफी के साथ वक़्त गुजा़रने का मौका मिला. 1984 की वो मुलाकात आज भी याद है कि जब उन्होंने रफी साहब की बहुत सी बातें शेयर की थी.
आज मैं रफी साहब का एक अदना चाहने वाला, शायर, एक्टर और ऐंकेर हूं, कोलकाता से हूं हैदराबाद में रहता हूं और अपना हर शब्द रफी साहब के नाम करता हूं”- जावेद नसीम

Email : jawaid77in@yahoo.com

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: