पतन की पूर्वपीठिका

डैड ने अपनी नवजात बेटी को चूमते हुए कहा,’आहा! यह देखो हमारी न्यू मिस इंडिया।’  मॉम ने इस पर ऐतराज करते हुए कहा,’न्यू मिस इंडिया क्यूं, न्यू मिस वर्ल्ड कहो!’ उक्त संवाद किसी विज्ञापन या फिल्म का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह वह संवाद है जो सुष्मिता सेन के ‘मिस यूनिवर्स’ और ऐश्वर्य राय के ‘मिस वर्ल्ड’ बनने के बाद अनेक घरों में बोला गया। हो सकता है कि कुछ घरों में बोले गये संवाद का स्वरूप कुछ यूं हो – मॉम (अपनी बेटी को चूमते हुए)- ‘मेली प्याली-प्याली खूबछूलत गुलिया बली होकल क्या बनेगी?’  बेटी (तुतलाते हुए)- ‘मिछ बल्द!’ मॉम- ‘हां, मेरी बेटी मिस वर्ल्ड बनेगी।’  डैड- ‘मेरी बेटी मिस वर्ल्ड नहीं मिस यूनिवर्स बनेगी।’ मेहता परिवार में इस तरह के संवाद वर्षों पहले बोले गये थे। ये संवाद सिर्फ संवाद नहीं एक सपना था जो शादी के बाद से ही मेहता दम्पति के मन में पल रहा था। मेहता दम्पति आधुनिकता में आम भारतीय दम्पतियों से कई वर्ष आगे थे। आम भारतीय दम्पति यह स्वप्न तब देखना शुरू किया जब सुष्मिता सेन और ऐश्वर्य राय जैसी खूबसूरत भारतीय लड़कियों ने अपने सुगठित, सुवासित और सुकोमल जिस्म से विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को रोशन किया, लेकिन मेहता दम्पति ने अपनी बेटी को ‘मिस वर्ल्ड’ अथवा ‘मिस यूनिवर्स’ बनाने का सपना आज से वर्षों पहले उसी समय देखना शुरू कर दिया था जब सुष्मिता सेन, ऐश्वर्य राय, डायना हेडन, प्रियंका चौपड़ा और मनप्रीत बरार का जन्म भी नहीं हुआ था।

मेहता दम्पति अपनी सोसाइटी की तरह समझदार, आधुनिकतावादी और प्रगतिशील था। वह समय और समाज से आगे चलना चाहते थे और चलना जानते भी थे। इसलिए जब समाज के ज्यादातर लोगों में बेटे की चाहत थी, उन्होंने बेटी की ख्वाहिश की ताकि उनकी बेटी बड़ी होकर विश्व में अपनी सुंदरता के जौहर से भारत का नाम रोशन करे। अपनी मातृभूमि के लिये इससे बड़ा योगदान और क्या हो सकता है कि उसके गौरव के लिए पुत्र सुख का बलिदान कर दिया जाये। यह सोचकर दोनो रोमांचित हो जाते और अपने को गौरवान्वित महसूस करने लगते। मिस्टर और मिसेज मेहता ‘ब्रॉड माइंडेड कपल थे। कोई दुराव-छिपाव पसंद नहीं था। वे दोनों हाय-हलो वाली ‘हिंग्लिश’  बोलने की कला में माहिर थे। वे कहते भी थे,’हम कितने ही माडर्न क्यों न हो जायें, हमें भारतीयता और अपने संस्कारों से नाता नहीं तोड़ना चाहिए।’  वे चाहें तो प्योर इंगलिश बोल सकते थे- लेकिन अपनी मातृभाषा का सम्मान करने के लिए वे हिन्दी युक्त अंग्रेजी ही बोलते थे।

मिस्टर मेहता अपने समय के सबसे आधुनिक स्कूल और कॉलेज से पढ़कर निकले थे। अपने तमाम संबंधों, अंग्रेजी बोलने की कला और बड़े-बड़े प्राइवेट फर्मों के मालिकों को पसंद आने वाली योग्यताओं के बल पर उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की भारतीय शाखा में अच्छे-खासे वेतन वाली नौकरी पायी थी। वे पूरी सुख-सुविधाओं और ऐशो-आराम से लबरेज इज्जत और रुतबे की जिन्दगी जीना चाहते थे। वे चाहते थे कि जिन्दगी की किसी भी कोने से सिसकियां सुनाई न दे। जीवन में एक पल को हंसी-खुशी, मौज-मस्ती और ऐय्याशी के साथ जीना चाहते थे। इसके लिए अच्छी नौकरी, खूब पैसे, सुख-सुविधाओं के ढेर सारे साधनों और हमबिस्तर होने के लिये तैयार रहने वाली ढेर सारी महिला दोस्तों का होना लाजिमी था। मिस्टर मेहता इन चीजों को हासिल करने के गुर जानते थे। वे कहते थे, ‘ इसमें मुश्किल क्या है। अगर आपमें कूबत हो तो पैसा हाथ का मैल है और अगर पैसे हों तो लड़कियां दौड़ी हुयी आपके पास आयेंगी।’  लेकिन मेहता को पिछड़े और पुरातन संस्कारों वाली लड़कियां नहीं चाहिये थी, उन्हें मार्लो-मुनरो जैसी ‘दरिया जिस्म’  लड़कियां चाहिये थीं,  जो आपके एहसान का बदला चुकाने के लिए अपनी एक-एक रात की नींद आपके लिए कुर्बान करे दे।

मिस्टर मेहता हर दिन किसी नयी महिला दोस्त की तलाश में रहते। उन्होंने अपने बैचलर जीवन में अनगिनत गर्ल फ्रेंड्स बनाये थे। उन्होंने अपनी दरिया-जिस्म महिला दोस्तों में से सबसे हसीन, जहीन, नमकीन, कमसिन और कमाऊ लड़की को पत्नी बनाने के लिए चुना, जो खुद किसी हैंडसम और योग्यतम लड़के की तलाश में थी। मिसेज मेहता मिस्टर मेहता से कहीं अधिक ब्रॉड माइंडेड, समझदार और आधुनिक थी। वह अपनी तमाम दिमागी और शारीरिक खूबियों को बखूबी फायदा उठाना जानती थीं। उन्होंने इन्हीं खूबियों के बल पर किसी बड़ी कंपनी के मालिक की पर्सनल सेक्रेटरी की नौकरी पायी थी- जरूरत के लिए नहीं, सिर्फ शौक, मन-बहलाव और प्रतिष्ठा के लिए। वह फिल्मों में हीरोइनों अथवा मशहूर मॉडल बनने की तमन्ना रखती थीं। लेकिन कोई चांस नहीं मिल पाने के कारण मन-मसोस कर रह गईं और टेलीविजन पर समाचार वाचन का पार्ट टाइम काम पाकर संतोष किया।

मेहता दम्पति ने आने वाले समय और समाज के मिजाज को भांपते हुए एक गोरी, सुंदर और छरहरी बेटी पाने का फैसला किया था। वे जानते थे कि आने वाले समय में जब सब कुछ यहां तक कि शरीर, आत्मा और विचार भी बिकाऊ हो जायेगा तो लड़कों की तुलना में लड़कियों की कीमत ज्यादा होगी। उन्होंने डॉक्टरों से मिलकर संतान को जन्म देने के पहले अल्ट्रासाउंड और भ्रूण परीक्षण करवा कर यह सुनिश्चित कर लिया था कि उनके घर आने वाला मेहमान लड़की ही है। उन्होंने लड़के की आशंका होने पर गर्भपात कराने का विचार कर लिया था। थैंक्स गॉड, वह लड़की ही थी। दोनों पति-पत्नी सुंदर, स्मार्ट और सेहतमंद थे ही- लिहाजा उनकी बेटी को भी सुंदर और स्मार्ट होना ही था। तभी तो मिस्टर मेहता ने उसमें न्यू मिस इंडिया का और मिसेज मेहता ने न्यू मिस यूनिवर्स का अक्श देखा था और दोनों ने हसीन-रंगीन स्वर्णिम भविष्य की कल्पनाओं में डूबना-उतराना शुरू कर दिया था।

मिस्टर और मिसेज मेहता का विश्वास था कि उनकी बेटी अपने मुंह में चांदी के चम्मच लेकर तो नहीं, लेकिन पेट में सोने के अंडे जरूर लेकर पैदा हुयी है। दोनों ने अपनी बेटी को उसी तरह से पालन-पोषण करना शुरू किया जैसे सोने के अंडे देने वाली मुर्गी का किया जाता है। उसे बचपन से ही हेल्थ-क्लब, योग-क्लब, व्यायाम-क्लब, जूडो-कराटे क्लब, डांस-क्लब, स्वीमिंग-क्लब और अन्य क्लबों में भेजा जाने लगा ताकि शरीर के एक-एक अंग का विकास सही ढंग से हो। पूरा शरीर सुडौल, सुकोमल और आकर्षक बने। जब वह थोड़ी बड़ी हुयी तो चिल्ड्रेन फैशन शो, गर्ल्स ब्यूटी कंटेस्ट आदि में भाग लेने लगी। उसने कई प्रतियोगिताओं जीत कर अपने मॉम-डैड को यकीन दिलाया कि वह उनके सपनों को पूरा करेगी। उसके मॉम-डैड ने इस मोड़ पर एक महत्वपूर्ण काम यह किया कि एक फिल्मी पत्रिका में फोटोग्राफर की नौकरी करने वाले अपने दोस्त को खाने पर बुलाया और अपनी डार्लिंग बेटी को अलग-अलग पोजों में तस्वीर खिंचवाई। ये तस्वीरें पत्र-पत्रिकाओं में छपने के लिये भेजी गईं। अनेक तस्वीरें जहां-तहां छपी भी।

इन तस्वीरों से सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि एक प्रसिद्ध ग्लैमर पत्रिका ने उसे अपने सबसे लोकप्रिय कॉलम ‘सेंटर स्प्रेड’  में छापने के लिये चुन लिया। पत्रिका वालों ने उसे अपने दफ्तर बुलाकर मशहूर फोटोग्राफर से अनगिनत वस्त्र-विहीन पोजों में उसकी तस्वीरें उतरवाई इनमें से उसकी कुछ चुनी न्यूड तस्वीरें पत्रिकाओं में छपी और रातों-रात वह मशहूर मॉडल बन गई। ये तस्वीरें इतनी कलात्मक ढंग से उतारी गईं थी कि उसके शरीर के एक-एक अंग की खूबियां और सुंदरता साफ-साफ परिलक्षित होती थी। इस खुशी के मौके पर उसके घर में पार्टी का आयोजन किया गया। वैसी पार्टी उन सब के लिये सामान्य बात थी। आये दिन अलग-अलग कारणों से पार्टियां होती रहती हैं अथवा वे पार्टियों में शामिल होते रहते हैं। लेकिन आज की पार्टी कुछ खास थी। यह मिस यूनिवर्स बनने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उसके डैड ने कुछ साथी पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भी बुलाया था-पार्टी खत्म होने पर उसकी विभिन्न पोजों और कपड़ों में तस्वीरें उतारी गईं। मिसेज मेहता की एक अत्यंत आत्मीय सहेली ने कहा,’देखना तुम्हारी बेटी एक दिन कमाल कर देगी।’

मिसेज मेहता ने गर्व से फूलते हुए कहा,’अरे यार! कमाल क्या तूफान मचा देगी! तूफान! मुझे तो अपनी बेटी पर गर्व है। कितना टैलेंटेड है।’  उधर मिस्टर मेहता के एक खास दोस्त ने कहा,’तुम्हारी बेटी काफी टैलेंटेड है। उसकी पर्सनलिटी कितनी बोल्ड है। यह बड़ी बात है। आज भी हमारे देश में ऐसे कई जगह हैं जहां औरतें अपना सिर तक ढके रहती हैं। ऐसे में किसी औरत में इतना बोल्डनेस आना कमाल की बात है। तुम्हारा भाग्य बहुत अच्छा है कि ऐसी बेटी मिली है।’ एक पत्रकार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए मिस्टर मेहता से पूछा, ‘आखिर आपकी बेटी की सुंदरता का राज क्या है?’  मिस्टर मेहता ने कहा,’हमने इसके जन्म से ही इसका खास ख्याल रखा है। और फिर बेटी किसकी है। हा-हा-हा!’  पत्रकार ने पूछा,’आगे की क्या योजना है?’  मिस्टर मेहता ने कहा,’अभी इसकी उम्र ही क्या है। थोड़ी बड़ी हो जाये तो उसे वर्ल्ड ब्यूटी कांटेस्ट में उतारने का इरादा है। फिल्म में भी जाने पर विचार कर रही है। मैं नहीं समझता कि फिल्मी दुनिया में इतनी खूबसूरत कोई हीरोइन है।……हमारी बेटी कितनी स्मार्ट है…..एक्चुअली शी लुक्स वेरी सेक्सी… और फिल्म लाइन में सफल होने के लिए तो इतना टैलेंट जरूरी है न।’

इन तस्वीरों के छपने के बाद उसके कैरियर में चार चांद लग गये। कई जगह से मॉडलिंग के ऑफर आने लगे। कई फैशन शोज में उसे अपना जिस्मानी टैलेंट दिखाने का मौका भी मिला। वह पार्टियों में शामिल होने लगी। पार्टियों के सिलसिले में रात-रात भर घर से बाहर रहना पड़ता। कुछ फिल्मों में उसे छोटे-छोटे रोल मिले। कई बार फिल्म निर्मार्ता या निर्देशक के साथ रात गुजारनी पड़ती और अपने जिस्मानी टैलेंट का जलवा भी दिखाना पड़ता। मेहता दम्पति की तरह उनकी बेटी भी ब्रॉड माइंडेड थी। मेहता परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और दिन-दूनी तथा रात-चौगुनी प्रगति का सबसे बड़ा कारण परिवार के सदस्यों का ब्रॉड मांइडेड होना ही था। वे लोग छोटी-मोटी बातों के लिए परेशान होकर जीवन के आनंद को बरबाद करने के पक्ष में नहीं थे। वे इतने खुले दिमाग और सुलझे विचार के थे कि आपस में अपने निजी जीवन के किसी पहलू को छिपाते नहीं थे।

मिस्टर और मिसेज मेहता पहले से काफी पैसा कमा ही रहे थे, लेकिन अब उनकी टैलेंटेड बेटी ने वास्तव में अपने को सोने के अंडे देने वाली साबित करते हुए घर में पैसे की ढेर लगा दी थी। मिस्टर और मिसेज मेहता ‘होनहार विरवान के होत चिकन पात’  वाले मुहावरे से परिचित थे और उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी अभी से जब इतनी करामात कर रही है तो भविष्य में वह क्या करेगी। पैसे की रेलमपेल होने के साथ घर में ऐशोआराम की वे तमाम चीजें उपलब्ध हुई, जो महानगर के चमकते-दमकते बाजार के शो-केस में सजे थे और जिन्हें पैसे देकर अपने अपने घर में सजाया जा सकता था। घर में रोज एक न एक सामान आने लगा। कोई आधुनिक सामान घर में आता, कुछ दिन तक नये मेहमान की तरह उसका आकर्षण बना रहता और बाद में ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’  बन जाता। कुछ दिन में उस सामान का कोई नया मॉडल बाजार आते ही नये मॉडल का सामान घर में आ जाता। पुराने मॉडल का सामान बेकार होकर मकान के तहखाने में बने कबाड़खाने का हिस्सा बन जाता। यह सोचा जा सकता है कि जिसे घर में नये-नये मॉडल के सामान दो-चार दिन में कबाड़ बन जाते थे तो मिसेज मेहता को मिस्टर मेहता की नजर में और मिस्टर मेहता को मिसेज मेहता की नजर में कबाड़ बनने में कितने दिन लगे होंगे। लेकिन चूंकि दोनों ब्रॉड मांइडेड थे, इस कारण दोनों के एक दूसरे के लिए कबाड़ हो जाने के बावजूद दोनों के बीच प्यार और सहयोग बना हुआ था। दोनों की भरपूर जीवन जीने की कला आती थी और इस कारण दोनों एक-दूसरे के आनंद और ऐशो-आराम के रास्ते में बाधक बनने के विरुद्ध थे। उनके सुखमय और तनाव रहित दाम्पत्य जीवन का राज यही था। दोनों एक-दूसरे की इच्छाओं की पूर्ति में रूकावट नहीं बने, बल्कि सहयोगी बने।

उदाहरण के लिये मिसेज मेहता को यह बात बखूबी मालूम थी कि मिस्टर मेहता की हर दूसरी-तीसरी रात किसी-न-किसी परस्त्री की बांहों में गुलजार होती है, लेकिन मिसेज मेहता ने कभी इस बात पर आपत्ति नहीं की, क्योंकि मिस्टर मेहता भी कभी मिसेज मेहता के दाम्पत्येत्तर संबंधों के मार्ग में बाधा नहीं बनते थे। अक्सर मिस्टर और मिसेज मेहता नाइट क्लबों और डांस क्लबों में साथ जाते और साथ घर आते थे, लेकिन क्लबों में दोनों की रातें एक-दूसरे की बांहों में नहीं, किसी और की बांहों में बीतती। जब क्लबों और पार्टियों से उनका मन ऊब जाता तो किसी दूसरे शहर में किसी अन्य ब्रॉड माइंडेड जोड़ी के साथ मौज-मस्ती उड़ाते और जीवन का आनंद लूटते। मिस्टर और मिसेज मेहता की सोसाइटी में ब्रॉड माइंडेड कपल्स को संक्षेप में बीएम कपल्स के नाम से जाना जाता था। इनकी रुचियों, शौक, शारीरिक विवरण, इच्छाएं आदि विभिन्न ग्लैमर पत्रिकाओं में उसी तरह से छपती थीं जिस तरह से अखबारों में वैवाहिक विज्ञापन छपते हैं। इन बीएम कपल्स के लिए विशेष क्लब भी होते थे। ये बीएम जोड़े इन क्लबों अथवा पत्रिकाओं के माध्यम से पत्र व्यवहार, टेलीफोन और अन्य तरीकों से दूसरे बीएम जोड़े से संपर्क करते थे। बात बन जाने पर ये दोनों जोड़े किसी एक के घर पर या किसी महंगे होटल में ‘चार जान एक जिस्म’  होकर चार-छह दिन साथ रहते थे। इस दौरान तन-मन, अपना-पराया, मेरा-मेरी, उसका-उसकी का भेद समाप्त हो जाता। ये जोड़े परम जिस्मानी आनंद उठाकर एक-दूसरे से जुदा होते और किसी नये जोड़े की तलाश में लग जाते।

मेहता परिवार की गाड़ी सुख-समृद्धि के रास्ते पर चलते-चलते उस समय हल्का हिचकोला खा गई जब उनकी आंखों का तारा और दुलारी बेटी ने उन्हें बताया कि वह बिन ब्याही मां बनने वाली है। मिस्टर और मिसेज मेहता को यह सदमादायक खबर सुनकर एकबारगी विश्वास नहीं हुआ कि उनकी इतनी टैलेंटेड, समझदार और स्मार्ट बेटी ऐसी गलती कर सकती है। उनकी बेटी ने उन्हें समझाया कि वैसे तो वह काफी सावधानी बरतती थी, लेकिन अब जब गलती हो ही गयी है तो यह माथापच्ची करने क्या फायदा कि कैसे, क्यों और कब उससे भारी चूक हो गयी। अब तो यह सोचना होगा कि इस मुसीबत से छुटकारा कैसे पाया जाये। अपनी बेटी की सफाई और दलीलें सुनने के बाद मिस्टर और मिसेज मेहता की जुबान पर पहला सवाल उभरा और जेहन में पहली चिंता उभरी वह यह थी कि इस बात का पता किसी को तो नहीं चला? शुक्र था कि उनकी बेटी इतनी नासमझ और लापरवाह नहीं थी। इस बात की उसने किसी को भनक तक लगने नहीं दी थी। लेकिन इतने से क्या होगा। अभी तो आगे काफी समय तक सावधानी बरतनी पड़ेगी क्योंकि अगर किसी को पता चल गया तो उनकी बेटी का पूरा कैरियर चौपट हो जाएगा और पूरे परिवार का सपना बिखर जाएगा। अभी तो उसे मिस इंडिया और बाद में मिस यूनिवर्स अथवा मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भाग लेना बाकी ही है। अब तो कुछ ऐसा उपाय करना होगा कि गर्भ ठहरने की बात को किसी को कानोंकान खबर न हो और गर्भ गिरवा लिया जाये। लेकिन अगर इस शहर में गर्भपात करवाया गया तो किसी-न-किसी तर से यह भेद लोगों को मालूम हो ही जायेगा। इसलिए उन्होंने अपनी हूर जैसी बेटी का अवांछित गर्भ किसी दूसरे शहर में गिरवाने का फैसला किया।

अनचाहे गर्भ से मुक्त होने के बाद मेहता परिवार ने मुक्ति की सांस ली। इसके बाद उनकी बेटी ने मिस इंडिया कांटेस्ट जीतने की तैयारी शुरू कर दी। चेहरा को सुंदर बनाने, जिस्म को चमकाने-दमकाने, बालों को संवारने की तरह-तरह की स्टाइलें, स्वीमिंग सूट पहन कर इतरा कर चलने और मोहक अंदाज के साथ जवाब देने की कला सीखी गई। कांटेस्ट में पूछे जाने वाले तरह-तरह के संभावित सवालों के जवाब रटे गये और प्रभावशाली ढंग से जवाब देने के तरीके सीखे गये। उसे ब्यूटी मेकिंग इंस्टीच्यूट में दाखिला दिलाया गया, जहां ब्यूटी प्रतियोगिताएं जीतने के प्रशिक्षण दिये जाते हैं। लेकिन अपने उभरे हुए उरोजों, नंगी सुडौल जांघों और विद्रूप मुस्कानों से निर्णायकों तथा दर्शकों को वशीभूत करने की उसकी कोशिश बेकार गयी और उसे दसवें स्थान पाकर संतोष करना पड़ा। इसलिए मिस यूनिवर्स अथवा मिस वर्ल्ड बनकर देश का नाम रोशन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता था। फिर भी यह कामयाबी कम नहीं थी। और अभी उसकी उम्र ही क्या थी। आगे पूरा जीवन पड़ा है जब अपने टैलेंट के बल पर पैसा, इज्जत और शोहरत हासिल की जा सकती है। दसवें स्थान पर आने से मॉडलिंग, विज्ञापन और फिल्मों में काम मिलने की प्रबल संभावना उत्पन्न हो गयी इसलिए मेहता परिवार में आगे आने वाले समय में अपने शानदार भविष्य का सपना देखने का सिलसिला जारी रहा।

मेहता परिवार के आनंदयुक्त जीवन की गाड़ी फिर से अपनी रफ्तार से चलनी शुरू हुई थी कि उनकी बेटी ने इसे एक और झटका दे डाला। यह झटका पहले से भी अधिक करारा था। उनकी बला की खूबसूरत बेटी ने घोषणा की कि वह शादी करने वाली है। बेटी की यह घोषणा सुनकर दम्पति को ऐसा लगा कि किसी ने उनके पैरों के नीचे से जमीन खींच ली हो। ‘शादी! इतनी कम उम्र में। अभी शादी की क्या जल्दी पड़ी है बेटी। अभी तो तुम्हें कैरियर के बारे में सोचना चाहिये।’  मेहता दम्पति ने केवल इतनी सी खुशियों के लिये पुत्र सुख का बलिदान नहीं किया था। उन्होंने तो सोचा था कि बेटी काफी समय तक उनके साथ रहेगी और सोने के अंडे देती रहेगी। अभी तो उसका बाजार ही बनना शुरू हुआ था। उसकी मांग तो अब बढ़नी थी। जिस्म के जिस पौधे को उन्होंने इतनी साधना, लगन और मेहनत के साथ वर्षों तक सींचा था वह अब गदराना शुरू हुआ था और उसमें अब फूल लगने की बारी थी। पैसे की बरसात तो अब होनी थी। अरे इस लाइन में तो शादी की बात तब सोची जाती है जब शरीर ढलने लगता है, हुस्न और जिस्म का जादू उतरने लगता है। लेकिन इतनी कम उम्र शादी करके पता नहीं क्यों अपने जिस्म की मूल्यवान दौलत को किसी एक पुरुष के हवाले करने का निर्णय लेकर अपने पैरों पर कुल्हारी मारना है।

मिस्टर और मिसेज मेहता ने तरह-तरह के तर्क देकर अपनी बेटी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी सारी कोशिश बेकार गयी। उनकी बेटी की जिद के आगे उनकी सारी कोशिशें बेकार हुयी। आखिरकार मेहता दम्पति को शादी के लिए हामी भरनी ही पड़ी। उनकी बेटी की धूमधाम से शादी हुयी। मेहता दम्पति ने सोचा था कि शादी के बाद उनकी बेटी उनके साथ रहेगी, लेकिन शादी होते ही दोनों बेटी-दामाद ने अलग रहने का फैसला किया। इस तरह मेहता परिवार का देश का नाम रौशन करने का वर्षों का सपना मिट्टी में मिल गया। बेटी के अलग होने के बाद मेहता दम्पति खास कर मिस्टर मेहता के लिये समय काटना और मुश्किल हो गया। इसलिए अब उनका ज्यादा समय क्लबों, पार्टियों और किसी ब्रॉड माइंडेड कपल के यहां ही गुजरता। हर सप्ताह किसी नये ब्रॉड माइंडेड कपल की तलाश होती थी। लेकिन यह तलाश इतनी आसान नहीं थी। तमाम ग्लैमर पत्रिकाओं का पढ़ना पड़ता था। वे कई ‘ब्रॉड माइंडेड कपल क्लब’  के सदस्य बन गये थे। ये क्लब ब्रॉड माइंडेड कपल से उनकी दोस्ती कराते थे। यह सिलसिला कई सालों तक चलता रहा। इस बीच उनकी बेटी ने भी एक खूबसूरत सी लड़की को जनम दिया। एक बार फिर मेहता दम्पति की आंखों में रंगीन सपने और उम्मीदें अंगडाई लेने लगी। उन्होंने अपनी बेटी के माध्यम से अपना सपना पूरा नहीं किया, लेकिन ईश्‍वर की अगर दया बनी रही तो उनकी नातिन उनके सपने को पूरा करेगी।

नातिन के आगमन के साथ मेहता दम्पति के जीवन में एक नया उत्साह, नयी उमंग, उयी उर्जा और नयी ताकत आ गयी थी। उनका आनंदमय जीवन ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक उनके जीवन में पूर्ण विराम लग गया। हुआ यूं कि ब्राड मांइडेड क्लब वालों ने उन्‍हें एक युवा दम्पति के साथ समय व्यतीत करने का ऑफर दिया। मेहता दम्पति काफी समय से किसी जवान जिस्म के साथ मस्ती लूटने के अनुभव से कटे हुये थे, इसलिये उन्होंने यह ऑफर तुरंत स्वीकार कर लिया। क्लब वालों ने दोनों दम्पतियों से बातचीत करके एक होटल में कमरा बुक किया जहां इन दोनों जोड़ों को जिस्मानी आनंद लूटने थे। मिस्टर और मिसेज मेहता पूरी तैयारी के साथ उस होटल में बुक कराये गये कमरे तक पहुंचे। उन्होंने कमरे में अपने आने की सूचना भिजवायी। कमरा खुलने पर जिस चेहरे पर उनकी नजर पड़ी उसे देखकर मेहता दम्पति हक्का-बक्का रह गये। दोनों उस चेहरे को पहचानने में कोई भूल नहीं कर सकते थे। दोनों को चक्कर आने लगे। वे वहां एक पल भी ठहर नहीं सके और तेजी से वापस आ गये। दोनों के मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे। आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। अगले दिन के अखबारों में एक खबर छपी – अधेड़ दम्पति ने घर में फांसी लगायी।

नोट – यह कहानी आज से करीब 15 साल पहले लिखी गयी थी। उस समय निजी टेलीविजन चैनलों की शुरुआत हो रही थी, लेकिन न तो एमएमएस आये थे, न इंटरनेट थे न फेसबुक। फिल्मों में भी ज्यादा खुलापन नहीं दिखता था। सोच के स्तर पर बदलाव आना शुरू ही हुआ था। उस समय की स्थितियों से आज की स्थितियों में काफी फर्क आ गया है।

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