कृष्ण कब वादा निभाएंगे

विनोद विप्लव

कृष्ण ने महाभारत के समय वादा किया था कि जब-जब धर्म की ग्लानि होगी और अधर्म बढ़ेगा, तब-तब वह धर्म के उत्थान के लिए, साधुओं के त्राण के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए तथा धर्म संस्था की स्थापना के लिए जन्म लेंगे। जबसे कृष्ण ने यह वादा किया तब से लाखों – करोड़ों भारतवासी कृष्ण के जन्म लेने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कृष्ण हैं कि जन्म लेते ही नहीं। उन्होंने यहां-वहां वादा थोड़े ही किया था।

गीता में वादा किया था। इसका लिखित दस्तावेज है। इसके बावजूद वह जन्म लेने के अपने वादे से मुकर रहे हैं। लाखों-करोड़ों लोगों के साथ वादाखिलाफी कर रहे हैं। उनसे अच्छे तो आज के नेता हैं जो कम से कम पांच साल में एक बार जनता के सामने प्रकट हो जाते हैं और अपना वादा निभा जाते हैं लेकिन कृष्ण हैं कि सैकड़ों-हजारों साल से लाखों-करोड़ों लोगों को झांसा पर झांसा दे रहे हैं। गोकुल, मथुरा, द्वारिका और वृंदावन समेत पूरे भारत में कृष्ण का इंतजार है। कहीं गोपियां उनकी विरह में जान दे रही हैं तो कहीं ग्वाल-बाल उनके इंतजार में पागल हो रहे हैं। पूरा भारतवंश उन्हें पुकार रहा है, ‘अब तो दर्शन दो घनश्याम। कितना चकमा दोगे। अब तो गीतावाला वचन निभा जाओ। अब तो हमारा उद्धार करो और अधर्मियों का नाश करो।’ लेकिन कृष्ण हैं कि आते ही नहीं। ऊपर से ही कहला भेजते हैं, ‘अभी अधर्म बढ़ा नहीं है। अगर तुम सब चाहते हो कि मैं इस युग में जन्म लूं, तो तुम सब मिलकर धर्म की ज्यादा से ज्यादा ग्लानि करो, क्योंकि अभी अधर्म उतना नहीं है कि मैं जन्म लूं। जब तक समाज में कूट-कूट कर अधर्म भर नहीं जाता, तब तक मुझे जन्म लेने में मजा नहीं आता।

 कृष्ण के कहे अनुसार भारतवासी पूरे जी-जान से अधर्म बढ़ाने में जुटे हैं। इसके लिए वे दिन-रात एक कर रहे हैं। हर व्यक्ति इसी कोशिश में है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा अधर्म बढ़े ताकि कृष्ण जन्म लें। अच्छे खासे अधर्मी अधर्म बढ़ा-बढ़ा कर आजिज आ चुके हैं। अधर्म बढ़ाते-बढ़ाते थक कर चूर हो गए हैं, हिम्मत जवाब दे चुकी है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि अब कितना अधर्म बढ़ाए। कई तो लस्त-पस्त होकर थक-हार कर बैठ गए हैं कि अब उनसे अधर्म नहीं बढ़ता। वष्रो से तो अधर्म बढ़ा रहें हैं। अधर्म बढ़ाने के चक्कर में खाना-पीना भूल गए, आदमी-आदमी की पहचान भूल गए और यहां तक कि खुद को ही भूल गए। लेकिन कृष्ण कह रहे हैं कि अभी भी अधर्म उतना नहीं बढ़ा है। अधर्म बढ़ने की अभी काफी गुंजाइश है। थोड़ा और जोर लगाओ। लोगों को समझ में यह नहीं आ रहा है कि अब कितना जोर लगाएं। अब हर तरफ तो अत्याचार है, बलात्कार है, लूट है, झूठ है। इससे ज्यादा अधर्म क्या होगा। कोई बताए तो सही कि आखिर अधर्म का कौन-सा रूप है, जो भारत में नहीं है। लेकिन कृष्ण को यह सब दिखाई ही नहीं दे रहा है। वह इस भयानक अधर्म को देखकर भी संतुष्ट नहीं हैं। वह कहते हैं कि उनके लिए इतना अधर्म काफी नहीं, महाभारत काल जितना तो अधर्म पैदा करो, ताकि मैं जन्म ले सकूं। अब पता नहीं, कृष्ण की संतुष्टि लायक अधर्म देश में कब और कैसे पैदा होगा। अब तो अधर्म का घड़ा छलछला रहा है। इसमें अब कुछ और अधर्म कैसे अटेगा। महाभारत काल में तो एक द्रौपदी की साड़ी खींची गई थी। यहां तो हर रोज और हर रोज न जाने कितनी द्रौपदियों को सरेआम नंगा किया जाता है, उन्हें जम कर पीटा जाता है, बाल पकड़ कर घसीटे जाते हैं, उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाता है। उन्हें घरों में पीटा जाता है, सड़कों पर पीटा जाता है, पार्कों में पीटा जाता है, पबों में पीटा जाता है। उनके साथ जो-जो किया जाता है उसकी कृल्पना खुद कृष्ण ने नहीं की होगी। अत्याचार के एक से बढ़कर एक रूपों का ईजाद किया जा चुका है। अमेरिका तक ने मान लिया कि भारत में अधर्म फैलाने में उसने जो योगदान दिया, वह वाकई सफल रहा। स्लमडॉग मिलिनेयर को ऑस्कर अवार्ड देकर इसकी पुष्टि कर दी है। अब देखना यह है कि कृष्ण अधर्म फैलाने के वर्षों से चल रहे अभियान को कब सफल मानते हैं और भारत को अधर्म से मुक्त करने के लिए कब जन्म लेते हैं। यह व्यंग्य दैनिक भाष्कर में प्रकाशित हो चुका है

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5 thoughts on “कृष्ण कब वादा निभाएंगे

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  1. महोदय, अभी धर्म मारा नहीं है, पूरी तरह, जब कि आप अपनी इच्छा अनुसार अपनी अभिव्यक्ति दे पा रहे हैं, जब तक हमें किसी व्यवस्था के सम्बन्ध में अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, समझिए अभी धर्म मारा नहीं, जब ये स्थिति आ जाय कि मारे भी और रोने भी न दे, तो जो पुकार दिल से निकलती है उस पुकार पर कृष्ण का जन्म होता है , और यकीन मानिए होता है, रूप अलग हो सकता है….. आपका व्यंग्य अच्छा है

  2. aapne jo likha hai wo acha hai but choti muhh badi baat kar rhi hu is ke liye maafi chahti hu lekin kon kehta hai bhagwan aate nhi aap droupati ki tarah sach dil se pukaro to sahi……..
    i know adharam bhut badh gya hai lekin prabhu unhe help karne aaj bhi aate hai jo roj unki sache dil se puja krte hai,direct darhan nhi dete but kisi ne kisi bhesh mein aate hai…..

    SANTA DE KAARJ AAP KHLOYA HAR KAAM KRAWAN AAYA RAM

  3. aapne jo likha hai wo acha hai but choti muhh badi baat kar rhi hu is ke liye maafi chahti hu lekin kon kehta hai bhagwan aate nhi aap droupati ki tarah sach dil se pukaro to sahi……..
    i know adharam bhut badh gya hai lekin prabhu unhe help karne aaj bhi aate hai jo roj unki sache dil se puja krte hai,direct darshan nhi dete but kisi ne kisi bhesh mein aate hai…..

    SANTA DE KAARJ AAP KHLOYA HAR KAAM KRAWAN AAYA RAM

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