भारत की संस्कृति से कटती मुंबइया फिल्मों में आज होली के रंग और उल्लास गायब हो गये हैं, लेकिन एक समय था जब होली के गीत और दृश्य हिन्दी फिल्मों के जरूरी हिस्से होते थे और होली के गीत और दृश्य फिल्मों को हिट बनाते थे। उस समय हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर जितना लोकप्रिय त्यौहार होली होती थी शायद ही कोई और पर्व उतना लोकप्रिय था। आज भी कई फिल्मों को हम होली से जुड़े गीत, संवाद और दृश्यों के कारण ही याद करते हैं। शोले, नवरंग, मदर इंडिया, फागुन, आन, कटी पतंग, सिलसिला और गाइड जैसी फिल्में इसका उदाहरण है।हिन्दी फिल्मों मे होली की खेले जाने की शुरूआत अमय चक्रवर्ती ने 1944 में की थी। दिलीप कुमार की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ मेें पहली बार होली गीत फिल्माया गया था।
‘मदर इंडिया’ के ‘होली आयी रे कन्हाई’ गीत में कंगन वाले हाथ दिखा कर नायक सुनील दत्त को चिढ़ाने का अन्दाज कहानी को दुखांत मोड़ पर ले आता था। शक्ति सामंत की फिल्म ‘कटी पतंग’ का नायक राजेश खन्ना ‘आज न छोड़ेंगे रे हमजोली’ कहता हुआ विधवा नायिका आशा पारेख के गुलाल लगा देता है। यह गीत आशा पारेख के फिल्म में चरित्र का टर्निंग प्वांइट साबित होता था। कुछ ऐसा ही ‘अरे जा रे हट नटखट’ (नवरंग), ‘सात रंग में खेल रही है दिलवालों की होली र’े (आखिर क्यों) और ‘पिया संग खेलूं होली’ (फागुन) जैसे होली गीतों में भी था।
नयी पीढ़ी की फिल्मकार पूजा भट्ट ने बतौर निर्माता अपनी पहली फिल्म में एक होली गीत रखा था पर युवा दर्शकों को उसमें मजा नहीं आया। इसे देखते हुए पूजा भट्ट ने अपनी बाद की किसी भी फिल्म में होली गीत रखने की हिम्मत नहीं जुटाई। पूजा भट्ट कहती हैं, ‘मुझे ऐसा कोई कारण नजर नहीं आया कि मैं अपनी अगली फिल्म में ऐसा कोई सीक्वेंस दोहराती।’
शायद यही कारण है कि अपनी लगभग हर फिल्म में होली गीत रखने वाले यश चोपड़ा फिल्मों में होली गीत नजर नहीं आते। ‘धूम’, ‘धूम – 2’, ‘नील एन निक्की’, आदि फिल्मों के विदेशी सरजमीं और कहानी वाली फिल्मों में होली गीतों की कोई गुंजाइश भी नहीं है।
फिल्म शोले की सफलता में जिन चीजों का योगदान है उनमें होली से जुडे संवाद एवं गीत का है लेकिन ‘शोले’ की रीमेक रामगोपाल वर्मा की ‘आग’ में शोले के होली गीत की नकल पर एक अदद होली गीत जिसे दर्शकों ने इसे बिल्कुल पसंद नहीं किया और यह फिल्म हिन्दी सिनेमा के सर्वाधिक फ्लाप फिल्मों में शुमार हो गयी। केतन मेहता की फिल्म ‘मंगल पांडेय – द राइजिंग हीरो’ की होली का भी यही हाल रहा।
हालांकि रवि चोपड़ा और विपुल शाह ने अपनी फिल्मों ‘बागबान’ और ‘वक्त- द रेस अगेंस्ट टाइम’ में होली गीत
रखा। हालांकि, ‘बागबान’ का होली गीत ‘खेलत रघुवीरा’ ब्रज की होली से प्रभावित था, वहीं ‘वक्त’ के गीत में डिस्को का प्रभाव था जिसमें नायक अक्षय कुमार डिस्को की धुन पर थिरकते हुए हाथों में पिचकारी पकड़े नायिका प्रियंका चोपड़ा से कहते हैं ‘डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली’ ।
पुराने जमाने के फिल्मकारों ने अपने अपने लिहाज से अपनी फिल्मों में होली का उपयोग किया। खासतौर पर निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा ने अपनी फिल्मों में होली और इसके रंगों का भरपूर उपयोग किया। ‘मशाल’ (होली आयी होली आयी देखो होली आयी), ‘डर’ (अंग से अंग लगाना साजन मोहे रंग लगाना साजन) और ‘मोहब्बतें’ (सोहणी सोहणी अंखियों वाली) जैसी फिल्मों के होली गीत प्रमाण हैं कि चोपड़ा ने होली के रंगों की मादकता का भरपूर उपयोग किया। ‘सिलसिला’ का ‘रंग बरसे चुनर वाली’.. गीत जहां होली की मस्ती का बयां करता था, वहीं फिल्म की कहानी को भी जबर्दस्त मोड़ देने वाला गीत था।
इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि प्रसिद्ध फिल्मकार अनुराग कश्यप की फिल्म ‘‘गुलाल’’ होली के मौके पर दर्शकों को शायरी के रंग से सराबोर करेगी। महानतम शायर एवं गीतकार साहिर लुधियानवी को समर्पित फिल्म 13 मार्च को सिनेमा घरों में रिलीज हो रही है।

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