थामा है बच्चों ने जो हाथों में छुरा, नर्म सी हथेली पे बंदूक है तो क्या 
नन्हें से फरिश्ते थे जो शक्ले खुदा, गया अब ईमान तेरा खुदा हाफिज 

कहते हैं खून से आयेगा इंकलाब, लाशे हैं बिछाई कत्ल बेहिसाब 
कैसे देगा बंदे अल्लाह को हिसाब, कत्ल है हराम तेरा खुदा हाफिज 

जग सारा बैरी हुये हैं ज़लील, कोई नहीं सुनता अब मेरी दलील 
मज़लूम मेरा मज़हब चैन अब हराम उठा हंस के जाम तेरा खुदा हाफिज 

वही सारा आलम वही बादशाह, नहीं रब ने मानी तेरी जो है राह 
अजब तेरे मकसद अजब तेरे काम, ले आखिरी सलाम तेरा खुदा हाफिज

….. आतिका अहमद फारूकी 

वो  ज़लील हमारी ईद काली कर गये

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