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How to get the first biography of Mohammad Rafi “Meri Aawaz Suno”

 

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Cover of the biography of Mohammad Rafi

Meri Awaz Suno is the first biography of your beloved singer – mohammad rafi. A number of rafi fans want to know about how to get the biography of rafi sahab- meri awaz suno.

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महाभारत धर्म युद्ध था या धन युद्ध था

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महाभारत का युद्ध अधर्म के खात्मे के लिए तथा धर्म की रक्षा के लिए किया गया जिसमें लाखों वीरों की बलि दी गई, लाखों महिलाएं विधवा हो गई, लाखों–करोड बच्चे अनाथ हो गए और लाखों माताओं की गोद सुनी हो गई।
कहा जाता है कि कौरव और खासतौर पर दुर्योधन और उसके पक्ष में लड़ने वाले अन्य लोग के प्रतीक थे और जिन लोगों ने दुर्योधन का साथ दिया वे अधर्मी थे और युद्ध में उनका नाश हो गया। दुर्योधन अगर गलत था और अधर्म के रास्ते पर था तो फिर क्यों कृष्ण ने अपनी सेना को क्यों दुर्योधन के पक्ष में लडने के लिए दे दिया और दुर्योधन की खातिर क्यों अपनी सेना खत्म हो जाने दिया।
क्या दुर्योधन अधर्म का प्रतीक था और इसलिए अधर्म पर धर्म की विजय के लिए महाभारत युद्ध हुआ और लाखों लोगों की मौत हुए, लाखों महिलाएं विधवा हो गई, लाखों बच्चे अनाथ हो गए। जो मारे गए वे केवल दुर्योधन के पक्ष में नहीं लड रहे थे वे भी मारे गए जो पांडवों के पक्ष में लड रहे थे। तो क्या इन लोगों का जो कौरव ⁄ दुर्योधन के पक्ष में युद्ध कर रहे थे वे ही मारे गए। तो चलिए मान लेते हैं कि वे सब अधर्मी थे इसलिए मारे गए। ऐसे में सवाल है कि कृष्ण की सेना के जो लोग दुर्योधन के पक्ष में युद्ध कर रहे थे वे भी अधर्मी थे। इसके अलावा पांडव के पक्ष में युद्ध करते हुए जो लाखों वीर मारे गए और जो महिलाएं विधवा हो गए, जो बच्चे अनाथ हो गए उनका क्या दोष था। वे तो धर्म के साथ थे तो फिर वे क्यों मारे गए। कृष्ण ने क्यों केवल अर्जुन को बचाने के लिए ही हर तरह का जतन किए बल्कि कई जगहों पर छल किया या छल करवाया। उन्होंने तो अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु और पांडव – द्रौपदी के पुत्रों को भी नहीं बचाया। क्या वे सभी अधर्मी थे।

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दीवाना मुझसा नहीं (2nd Edition of the 1st part of Rafi Ki Dunia/The World of Rafi)

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Cover : Rafi Ki Dunia

Deewana Mujhsa Nahi is 2nd Edition of Rafi Ki Dunia/The World of Rafi (Part 1), compiled, edited and presented by Film Writer and Journalist Vinod Viplav. This is a collection of selected articles in (English and Hindi) on various facets of the life of legendary singer Mohammed Rafi, the incredible range of his voice, the phenomenal repertoire of songs encompassing all genres of music and a huge fan following from across the world cutting across gender and age barriers. Some articles are in English also. Vinod Viplav has also written the first biography of the Mohammad Rafi ‘Meri Awaz Suno’ and biographies of great actor Dilip Kumar, Raj Kapoor and Devanand. There are 172 pages with pictures related to Mohammed Rafi.

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पड़ोसन की चाय

यह उन दिनों की बात है जब आईआईएमसी का कोर्स खत्म होने के बाद मैं और सत्येंन्द्र रंजन जनकपुरी में एक डीडीए मकान में बरसाती में रहते थे। छत पर एक कमरा बना हुआ था और कमरे के आगे थोड़ी सी खुली जगह थी जहां किसी-किसी दिन दोपहर को उसी मकान के बीच वाले फ्लोर (दूसरे फ्लोर) पर किराए पर रहने वाली एक छरहरी सी, गोरी सी और सुंदर सी पडोसन कपड़े डालने आती थी। वह अपने पति के साथ रहती थी। शादी हाल में ही हुई थी। सत्येंन्द्र रंजन उन दिनों जनसत्ता में नौकरी करते थे और इसलिए ज्यादातर दिन ड्यूटी पर चले जाते थे। सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य, उस समय तक मेरी नौकरी नहीं लगी थी इसलिए ज्यादातर दिन घर पर ही होता था और हिन्दूस्तान, जनसत्ता आदि आदि अखबारों से एसाइनमेंट लेकर आता था और घर में रहकर लेख आदि लिखता था। एक या दो बार जब कपड़े डालने आयी तो क्या करते हैं और कहां के रहने वाले हैं टाइप की एक दो बातें हुई।
उन दिनों अक्सर अब्दुल माबूद वहां आ जाता था और एक-दो दिन रह जता था। उन्हीं दौरान रांची के पत्रकार नवीन सिन्हा जी, जो सत्येन्द्र रंजन के भाई के दोस्त थे, भी आए हुए थे और कुछ दिन उसी मकान में रह रहे थे। एक दिन संभवत रविवार को यूं ही गपशप में पड़ोसन की बात निकली तो सत्येंद्र रंजन ने कहा कि विनोद की पड़ोसन से दोस्ती है। नवीन सिन्हा जी ने कहा कि अगर दोस्ती है तो उसका कुछ प्रमाण मिले। उन्होंने कहा कि अगर मैं पड़ोसन के घर से पड़ोसन के हाथों बनी चाय सबके लिए लेकर आ जाउं तो वह मान जाएंगे। मैंने कहा कि अगर मैं ऐसा कर दूं तो। नवीन सिन्हा ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह अपनी तरह से सबको शानदार पार्टी देंगे। मैं कभी पड़ोसन के घर नहीं गया था लेकिन मैंने सोचा चलो, जो होगा देखा जाएगा। मैं सीढी से नीचे उतरा और उनके यहा चला गया। वहां जाने पर देखा कि उनके पति महोदय ड्राइंग रूम में बिस्तर पर लेटे हुए हैं। मैं सामने सोफे पर बैठ गया। मैंने कहा कि मैं उपर वाले मकान में रहता हूं। आप कैसे हैं। पता चला कि उन्हें वायरल बुखार है। मैंने कहा कि कोई जरूरत हो तो बताइएगा। फिर मैंने कहा कि मेरे यहां कुछ मेहमान आए हैं और गैस खत्म हो गई है। सो अगर चाय बन जाए …………………।

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बचपन की यादे : पार्ट 2 हमारे बचपन का रेडियो

आज दशकों बाद राजगीर से जुड़ी यादें अक्सर दिमाग में कौंध जाती है और फिर रोना आ जाता है। लगता है एक खूबसूरत दुनिया खत्म हो गई। अक्सर लगता है कि काश वह समय दोबारा लौट आए। उस समय की यादें अक्सर उन फिल्मों के गाने को सुनने से ताजी होती है जो हमारे बचपन के दिनों में बजते थे। उन दिनों रेडियो कुछ चुनिंदा लोगों के पास ही होते थे और रेडियो का होना प्रतिष्ठा का सबब होता था। पढ़ना जारी रखें “बचपन की यादे : पार्ट 2 हमारे बचपन का रेडियो”

बचपन की यादें (पार्ट -1) : सरमेरा से राजगीर

बचपन की यादें (पार्ट -1) 
सरमेरा से राजगीर
मेरे बचपन की ज्यादातर यादें राजगीर से ही जुड़ी है जहां मेरे बचपन का अधिकांश समय बीता और जो जीवन का संभवत सबसे खूबसूरत समय था। राजगीर में मैंने तीसरी कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी। उससे पहले की पढ़ाई गांव के स्कूल में की थी। गांव का स्कूल गांव के ही किसी व्यक्ति के दलान में लगता था। गांव में जो स्कूल था, उसकी कोई स्मृति अब मेरे मस्तिष्क में नहीं है। इतना याद है कि मैं स्कूल जाने के लिए घर से बस्ता लेकर निकलता था, अपने दलान (घर से बाहर घर के पुरूषों एवं मेहमानों के बैठने की जगह) में बस्ते को छिपाकर खेलने के लिए कहीं निकल जाता था-अलंग (नदी के दोनों तरफ बनाई गई मिट्टी की थोड़ी उंची और मोटी दीवार, जिसका उपयोग चलने-फिरने, बैठकर बतियाने और दिशा मैदान के लिए होता है) की तरफ या नदी के पार पेड़ो के बगान की तरफ।

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जो शीशा गर हैं वो भी बात ये मेरी जरा सुन लें – रफी के सामने सारे ही शीशे चूर होते हैं

जावेद नसीम 

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Sketch of Mohammad Rafi by Mohammad Salim

बात उस वक्त की है जब मेरी उम्र 6 साल की थी। मैं परिवार के साथ कोलकाता के हिन्द सिनेमा में फिल्म देखने गया था। वापस आया तो मेरी जबान पर मेरे ही अंदाज में एक नगमा चढ़ा  हुआ था – एहसान तेरा होगा मुझ पर। मुझे नहीं पता था कि यह गीत है, गजल है या कुछ और है। किसने लिखा, किसने गाया। मुझे कोई अंदाजा नहीं था। मैं ना ही फिल्म के कलाकारों को पहचानता था। ना ही मुझे ये मालूम था कि फिल्म क्या होती है लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बस गई थी – वो आवाज। मुझे नहीं पता था कि किस की आवाज थी पर ऐसा लगता था कि कानों में अमृत घुल गया है।
दिन गुजरते गए। मेरी जिद पर अब्बा ने फिलिप्स का एक रेडियो खरीद दिया। छोटे-छोटे हाथों से सुई घुमा-घुमा कर वो आवाज तलाष करता रहा और फिर तो जैसे मेरी ईद हो गई। वो आवाज अलग – अलग अंदाज में मेरे कानों में रस घोलने लगी और मैं उस आवाज का दीवाना होता चला गया। वो आवाज थी रफी साहब की।
वक्त के साथ जिंदगी में बहुत सारी चीजें बदलने लगी पर जो कभी नहीं बदला वो थी रफी साहब से मेरी मुहब्बत। जैसे-जैसे मैं उन्हें सुनता गया वो मेरे आदर्श बनते चले गए। इतनी मधुरता, इतनी सादगी, इतनी जज्बात निगारी और इतनी सारी शैलियों में पूरी कामयाबी के साथ खुद को कायम रखना इतना आसान नहीं था। पर रफी साहब के लिए ये कभी मुष्किल भी नहीं रहा । मैं रफी साहब को पाश्र्वगायन के सरताज और सरदार की हैसियत से देखता हूं और यह मानता हूं कि वो एक ट्नेंड सेटर थे क्योंकि उनसे पहले पाष्र्व गायन का अंदाज कुछ और ही हुआ करता था और सारे गायकों पर  के एल सहगल साहब पूरी तरह से हावी थे। ऐसे में रफी साहब ने हिन्दी फिल्म जगत को एक नया अंदाज दिया और एक नई बुलंदी दी। वह ए क्लास के अभिनेताओं की पहली पसंद थे और बी और सी क्लास के अभिनेताओं के लिए मसीहा बन गए। अंजान चेहरों के लिए उनकी आवाज उनकी जिंदगी का सरमाया बन गई।

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Aazadi Satyagrah for the children of Gorakhpur

Join Team MASUKA at Jantar Mantar at 4:00 pm on August 14, 2017. In view of the unfortunate loss of young lives at Gorakhpur on August 8, ’17 and the brutal murder of Ragini Dubey at Balia, Uttar Pradesh and other encroachments on women rights and liberty, we, the children of Bapu, Mahatma Gandhi will be holding an Aazadi Satyagrah. Team MASUKA will introspect in … पढ़ना जारी रखें Aazadi Satyagrah for the children of Gorakhpur

खतरनाक हो सकता है वाट्सएप का ज्यादा इस्तेमाल

A_young_girl_using_touch_— विनोद विप्लव
आजकल युवाओं में फेसबुक और वाट्सएप् जैसे सोशल नेटवर्किंग माध्यमों की लत तेजी से बढ़ रही है आर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि इनके बहुत अधिक उपयोग से कलाई और उंगलियों की जोड़ों में दर्द, आर्थराइटिस तथा रिपिटिटिव स्ट्रेस इंज्युरिज (आरएसआई) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

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घर पर कैसे बनायें ”फिल्टर पम्प”

हम सुझायें आप बनायें श्रृंखला से प्रकाशित आलेख। इसके तहत घर में विभिन्न उपकरणों को बनाने के सुझाव बताये गये थे। यह आलेख प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ में सितम्बर, 1992 के अंक में प्रकाशित हुआ था। पढ़ना जारी रखें घर पर कैसे बनायें ”फिल्टर पम्प”

घर पर कैसे बनायें थियोडोलाइट /दूरस्थ वस्तु की उंचाई मापने का यंत्र/

हम सुझायें आप बनायें श्रृंखला से प्रकाशित आलेख। इसके तहत घर में विभिन्न उपकरणों को बनाने के सुझाव बताये गये थे। यह आलेख प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ में मार्च, 1980 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इसमें बताया गया था कि कैसे घर में थियोडोलाइट नामक उपकरण बना सकते हैं। यह यंत्र दूर स्थित किसी वस्तु — घर, पहाड़, पेड़ आदि की उंचाई मापने … पढ़ना जारी रखें घर पर कैसे बनायें थियोडोलाइट /दूरस्थ वस्तु की उंचाई मापने का यंत्र/