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  • Madhubala – Dard Ka Safar

    Madhubala stands for boundless beauty, it also stands for limitless pain. A biography of this eternal beauty has been published by SACHI PRAKASHAN and written by Sushila Kumari, who has revisited the painful side of Madhubala's journey in her biography, “Madhubala – Dard Ka Safar”.
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  • Mohammad Rafi – A tribute by Vinod Viplav (part 1)

  • जो सच सच बोलेंगे मारे जाएंगे।

    जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे मारे जाएंगे। कठघरे मे खडे कर दिए जाएंगे जो विरोध में बोलेंगे जो सच सच बोलेंगे मारे जाएंगे। बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि किसी की कमीज हो उनकी कमीज से ज्यादा सफेद कमीज पर जिनके दाग नहीं होंगे मारे जाएंगे। धकेल दिए जाएंगे कला की दुनिया से बाहर जो चारण नहीं होंगे जो गुण नही गाएंगे मारे जाएंगे। धर्म की ध्वजा उठाने जो नहीं जाएंगे जुलूस में गलियां भून डालेंगीं उन्हें काफिर करार दिए जाएंगे। सबसे बडा अपराध है इस समय में निहत्थे और निरपराधी होना जो अपराधी नही होंगेमारेजायेंगे - राजेश जोशी की एक कविता

The second edition of a biography of Mohammad Rafi “Meri Aawaz Suno” hits the stands

 

We know Mohammad Rafi as a singer par excellence and have grown up on his songs. But we have barely given a thought that he sung several songs for lesser known characters in films. Click here to read the full story,  published in the Hindu on Nov 01, 2008

धर्म के नाम पर दे दे बाबा

- विनोद विप्लव
भारत में आज धर्म का बोलबाला है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के चरम विकास के इस युग में हमारे देश की बहुसंख्यक जनता की सोच में धर्म और आस्था हावी होती जा रही है। कुछ समय पूर्व एक प्रमुख राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्रिका की ओर से कराये गये सर्वेक्षण में यह तथ्य उभर कर सामने आया कि हमारे देश में लोगों का धर्म, ईश्वर और कर्मकांडों के प्रति विश्वास बढ़ा है। यहां तक कि नयी पीढ़ी खास तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर, ई- काॅमर्स, मीडिया, फैशन, मार्केटिंग बीपीओ, एनपीओे और और प्रबंधन जैसे आधुनिक पेशों से जुड़े युवा वर्ग के लोगों की धर्म के प्रति आस्था और पूजा-पाठ जैसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सेदारी बढ़ी है। Read the full post »

भूत चैनल

हमारे देश की जनसंख्या एक अरब से भी अधिक हो गयी है। हमारे देश में हर साल तकरीबन एक करोड़ लोगों की मौत होती है। हिन्दी के टेलीविजन चैनलों ने अपने शोधों से पता लगाया है कि मरने वाले शर्तिया तौर पर भूत बनते हैं और इस तरह से कहा जा सकता है कि हर दिन करीब 27 हजार भूत जन्म लेते हैं। Read the full post »

कर्मवीर बनाम फलवीर

गीतोपदेश के आधार पर कहा जा सकता है कि हमारे देश में दो तरह के लोग हैं। पहले तरह के लोगों को केवल कर्म का अधिकार है। कर्म के फल पर उनका कोई अधिकार नहीं है, जबकि दूसरे तरह के लोगों का केवल फल पर अधिकार होता है, उनका कर्म पर कोई अधिकार नहीं होता है। अर्थात् पहले तरह के लोग केवल कर्म के अधिकारी होते हैं, उनके कर्म के फल के अधिकारी दूसरे लोग होते हैं। दूसरे तरह के लोग केवल फल के अधिकारी होते हैं, उन्हें कर्म करने का नहीं केवल फल पाने और खाने का अधिकार होता है।
इस तरह से समाज में दो वर्ग हैं – कर्मवीर ओर फलवीर और इन दोनों का ही महत्व है। अगर कर्मवीर नहीं होंगे तो समाज चलेगा नहीं और अगर फलवीर नहीं होंगे तो कर्मवीरों के कर्मों से भारी मात्रा में उत्पन्न होने वाले फलों को खायेगा कौन और अगर इतने सारे फल खाये बगैर रह जायेंगे तो समाज में भयानक सड़ांध पैदा होगी और समाज रहने लायक रहेगा नहीं। Read the full post »

व्यंग्य – मैं, मैं नहीं हूं

आप जो हैं, वह दरअसल आप नहीं, मैं हूं। मैं जो हूं, दरअसल मै नहीं, कोई और हूं। मेरी कंपनी का जो मालिक है वह दरअसल यहां का चपरासी है और मैं जो इस कंपनी का अदना सा कर्मचारी हूं, सच्चाई यह है कि मैं ही इस कंपनी का मालिक हूं। आप शायद चक्कर में पड़ गये। दरअसल यह घपला पुनर्जन्म के कारण हो रहा है। अगर आप इसे समझ लेंगे तो सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी की तरह हो जायेगा।
पुनर्जन्म हम भारतीयों के लिये अत्यंत प्रिय विष्‍ाय है। इससे आदमी को जीवन में कुछ भी नहीं करने का दुख नहीं होता। जीवन भर निक्कमा-निठल्ला रहने वाला व्यक्ति भी गर्व और संतोष के साथ मर सकता है कि अगले जन्म में वह अमरीका का राष्‍ट्रपति होगा।

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My Short Stroy – Chakravyuh

This Story was published in Naya Path, Published by Janvadi Lekhak Sangh.

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शायद भगत सिंह का नया अवतार हरविंदर हो !

-अरुण कुमार मयंक

भारत में लोकतंत्र है .पर लोकतंत्र का यह कौन सा घिनौना रूप दृष्टिगोचर हो रहा है? जनता के वोटों के बल पर कुर्सी पर बैठने वाले नेताओं ने जनता के साथ बेहद  क्रूर मजाक किया है . यहाँ के शासकों ने  पूरे देश को महंगाई , बेरोजगारी , रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल दिया है. देश के तमाम नेताओं को शरद पवार को चांटा  मारना नागवार लग  रहा है . पर इन नेताओं को यह नज़र  नहीं आ रहा है कि आखिर वो कौन सी परिस्थितियां आन पड़ी कि इस देश के एक नौजवान को केंद्रीय मंत्री पर थप्पड़ चलाना पड़ा ? देश के तमाम नेता आज ध्रितराष्ट्र बन गए हैं .  उन्हें हरविंदर का थप्पड़ नज़र आ रहा है, पर उन्हें देश की बद से बदतर होती हालत दिखायी नहीं दे रही है.

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तब मैं बे-नौकरी रहना ज्यादा पसंद करूंगा!

अगर जनता चेत गयी तो चैनल चलाने वालों की खैर नहीं : ढिबरी न्यूज चैनल को लेकर लिखे मेरी दो व्यंग्य रचनाओं -  ‘ढिबरी न्यूज में भर्ती अभियान’ और ‘ढिबरी न्यूज में चैनल प्रमुख के लिए खुली अर्जी‘ – पर मुझे जो प्रतिक्रियायें मिलीं, वे अभूतपूर्व हैं। ये दोनों व्यंग्य लिखने के दौरान मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि दो अदद व्यंग्य रचनाओं के कारण टेलीविजन चैनलों में मेरे इतने अधिक प्रशंसक एवं दुश्मन पैदा हो सकते हैं। यह बात जरूर है कि पैदा होने वाले मेरे दुश्मनों की संख्या से कई गुना अधिक संख्या मेरे प्रशंसकों की रही और यह बात केवल यही जाहिर करती है कि चैनलों में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के प्रति वहां काम करने वाले मीडियाकर्मियों के मन में किस तरह का आक्रोश है। Read the full post »

वीर अनशनकारियों का देश

अन्ना हजारे से नाराज हमारे महान नेताओं और मंत्रियों को इस बात पर घोर आपत्ति है कि केवल 12 दिन भूखे रह कर एक मामूली आदमी जननायक बन गया जबकि वर्षों से देश सेवा में जी-जान से जुटे नेताओं और मंत्रियों को कोई भाव नहीं दे रहा है, जिनकी बदौलत देश के लाखों गरीब, मजदूर और किसान वर्षों आमरण अनशन कर रहे हैं। अन्ना का अनशन तो 12 दिन में ही खत्म हो गया लेकिन देश के नेताओं के कारण लाखों लोग महीनों-वर्षों तक आमरण अनशन कर रहे हैं और कई तो अपने अनशन के प्रति इतने समर्पित होते हैं कि वे भूख के कारण स्वर्ग सिधार जाते हैं, लेकिन अपना अनशन नहीं तोड़ते, लेकिन इन्हें कोई महत्व नहीं दे रहा है। Read the full post »

The Rape of Draupadi

by Satya Chaitany

(As according to Bheel Mahabharata )

The tribal Bheels have a Mahabharata version of their own, episodes of which are narrated or sung during their festivals, usually accompanied by music and sometimes with dance – a captivating version that never fails to thrill, one of the secrets of its allure being its truly enchanting folktale-like quality. This article tries to understand an episode from it, on its own and in relation to Vyasa’s epic. Read the full post »

पतन की पूर्वपीठिका

डैड ने अपनी नवजात बेटी को चूमते हुए कहा,’आहा! यह देखो हमारी न्यू मिस इंडिया।’  मॉम ने इस पर ऐतराज करते हुए कहा,’न्यू मिस इंडिया क्यूं, न्यू मिस वर्ल्ड कहो!’ उक्त संवाद किसी विज्ञापन या फिल्म का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह वह संवाद है जो सुष्मिता सेन के ‘मिस यूनिवर्स’ और ऐश्वर्य राय के ‘मिस वर्ल्ड’ बनने के बाद अनेक घरों में बोला गया। हो सकता है कि कुछ घरों में बोले गये संवाद का स्वरूप कुछ यूं हो – मॉम (अपनी बेटी को चूमते हुए)- ‘मेली प्याली-प्याली खूबछूलत गुलिया बली होकल क्या बनेगी?’  बेटी (तुतलाते हुए)- ‘मिछ बल्द!’ मॉम- ‘हां, मेरी बेटी मिस वर्ल्ड बनेगी।’  डैड- ‘मेरी बेटी मिस वर्ल्ड नहीं मिस यूनिवर्स बनेगी।’ Read the full post »

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